आज का पंचांग — 31 जुलाई 2026
नई दिल्ली के लिए आज के पाँचों अंग, स्थानीय सूर्योदय 05:42 IST पर पढ़े गए। नीचे अपना नगर चुनिए — पूरा पृष्ठ उसी स्थान के लिए फिर से गणना करता है। आज इन तीस नगरों में सूर्योदय का अंतर लगभग 87 मिनट है, और हर तिथि-सीमा तथा काल उसी के साथ खिसकता है।
आज का पंचांग
आज का विशेष
दिल्ली में कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ के लिए यमुना के घाट भर जाते हैं — संध्या अर्घ्य सूर्यास्त पर और उषा अर्घ्य अगले सूर्योदय पर दिया जाता है, इसलिए इस पृष्ठ पर दिया गया सूर्योदय-सूर्यास्त ही व्यावहारिक समय है। आश्विन के शुक्ल पक्ष में रामलीला विजयादशमी तक चलती है।
नई दिल्ली में आज श्रावण कृष्ण द्वितीया है, जो 22:20 तक रहेगी। कुछ भी नया आरंभ करने के लिए राहु काल 10:46–12:28 से बचें; दिन की सबसे स्वच्छ खिड़की अभिजित मुहूर्त 12:01–12:55 है।
नगर के अनुसार पंचांग
- नई दिल्ली New Delhi
- मुंबई Mumbai
- बेंगलुरु Bangalore
- हैदराबाद Hyderabad
- चेन्नई Chennai
- कोलकाता Kolkata
- पुणे Pune
- अहमदाबाद Ahmedabad
- जयपुर Jaipur
- लखनऊ Lucknow
- सूरत Surat
- नागपुर Nagpur
- इंदौर Indore
- भोपाल Bhopal
- वाराणसी Varanasi
- आगरा Agra
- गुरुग्राम Gurgaon
- नोएडा Noida
- चंडीगढ़ Chandigarh
- अमृतसर Amritsar
- कोयंबटूर Coimbatore
- कोच्चि Kochi
- तिरुवनंतपुरम Thiruvananthapuram
- मैसूर Mysuru
- भुवनेश्वर Bhubaneswar
- गुवाहाटी Guwahati
- ऋषिकेश Rishikesh
- हरिद्वार Haridwar
- तिरुपति Tirupati
- उज्जैन Ujjain
पंचांग है क्या
पाँच अंग, जो किसी स्थान और किसी क्षण के लिए गिने जाते हैं — तिथि (सूर्य से चंद्रमा की कोणीय दूरी, बारह-बारह अंश में), वार (दिन और उसका ग्रह-स्वामी), नक्षत्र (चंद्रमा किस चंद्र-भवन में है), योग (दोनों देशांतरों का योग) और करण (आधी तिथि)। राहु काल, चौघड़िया और मासिक कैलेंडर के पर्व-चिह्न — सब इन्हीं पाँच तथा उस दिन के वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त से निकलते हैं। इसीलिए यह पृष्ठ नगर पूछता है: किसी और के क्षितिज के लिए बना पंचांग एक अलग दस्तावेज़ होता है।
यह पृष्ठ क्या नहीं बता सकता
यह पंचांग है, जन्मपत्री नहीं। यहाँ की तिथि, नक्षत्र, योग, करण और काल सबके लिए एक जैसे हैं — इनमें आपकी जन्मकुंडली, चंद्र राशि, चल रही महादशा या किसी मुहूर्त पर उदित होने वाला लग्न शामिल नहीं है। कई व्रतों का अपना नियम है: जन्माष्टमी मध्यरात्रि से तय होती है, दीपावली प्रदोष से, और कुछ एकादशी व्रत पारण-काल से — ऐसे दिनों में मंदिर की घोषणा इस पृष्ठ से एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। संदेह हो तो अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से मिलान करें।