तिरुपति का आज का पंचांग सोमवार, 28 सितंबर 2026 · भाद्रपद कृष्ण द्वितीया
तिरुपति में आज सूर्योदय 06:02 IST पर है — नई दिल्ली से 11 मिनट पहले, क्योंकि यह नगर 79.42°पू पर है जबकि घड़ी 82.5°पू के लिए तय है। नीचे दिया हर मान इसी स्थानीय सूर्योदय पर पढ़ा गया है, जो परंपरागत आधार है।
आज का पंचांग
तिथि क्रम
| दिन | तिथि | समाप्ति |
|---|---|---|
| कल (बीता) · रवि 27 सितंबर | कृष्ण प्रतिपदा | 21:03 |
| आज · सोम 28 सितंबर | कृष्ण द्वितीया | 19:20 |
| कल (आने वाला) · मंगल 29 सितंबर | कृष्ण तृतीया | 17:18 |
आज का विशेष
तिरुमला में सुप्रभातम लगभग तीन बजे गाया जाता है — इस पृष्ठ पर दिए सूर्योदय से क़रीब ढाई घंटे पहले — और पूरे दिन की सेवाएँ उसी से क्रम में चलती हैं। वैकुंठ एकादशी, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी, वर्ष का सबसे भारी दिन है, जब वैकुंठ द्वार उसी भोर के पहले खुलता है।
तिरुपति में आज भाद्रपद कृष्ण द्वितीया है, जो 19:20 तक रहेगी। कुछ भी नया आरंभ करने के लिए राहु काल 07:32–09:02 से बचें; दिन की सबसे स्वच्छ खिड़की अभिजित मुहूर्त 11:39–12:27 है।
तिरुपति — आगामी सात दिन
| दिनांक | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम 28 सितंबर | कृष्ण द्वितीया | रेवती | 07:32–09:02 |
| मंगल 29 सितंबर | कृष्ण तृतीया | अश्विनी | 15:03–16:34 |
| बुध 30 सितंबर | कृष्ण चतुर्थी | भरणी | 12:02–13:33 |
| गुरु 1 अक्टूबर | कृष्ण पंचमी | कृत्तिका | 13:32–15:02 |
| शुक्र 2 अक्टूबर | कृष्ण षष्ठी | मृगशिरा | 10:32–12:02 |
| शनि 3 अक्टूबर | कृष्ण सप्तमी | आर्द्रा | 09:02–10:32 |
| रवि 4 अक्टूबर | कृष्ण नवमी | पुनर्वसु | 16:31–18:00 |
तिरुपति का मासिक कैलेंडर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तिरुपति में आज सूर्योदय कब है, और वह दिल्ली से अलग क्यों है?
तिरुपति में आज सूर्योदय 06:02 IST और सूर्यास्त 18:05 IST पर है — नई दिल्ली की तुलना में 11 मिनट पहले। कारण देशांतर है: पूरा भारत एक ही घड़ी (82.5°पू) पर चलता है, जबकि तिरुपति 79.42°पू पर स्थित है, और हर डिग्री लगभग चार मिनट का अंतर लाती है। इस पृष्ठ की तिथि, नक्षत्र, राहु काल और चौघड़िया — सब इसी स्थानीय सूर्योदय से गिने गए हैं, किसी दिल्ली-आधारित पंचांग से नहीं।
यह पृष्ठ तिरुपति के लिए कौन-सी मास-परंपरा मानता है, और क्या इससे तिथि बदलती है?
तिरुपति तेलुगु प्रदेश का अमांत मास पढ़ता है, इसलिए यहाँ उगादि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को वर्ष खोलती है और कृष्ण पक्ष के मास-नाम दिल्ली के पंचांग से एक पीछे चलते हैं। पहाड़ी मंदिर का अपना क्रम मुख्यतः सौर और नक्षत्र-आधारित है — ब्रह्मोत्सवम कन्या सौर मास में पड़ता है और श्रवण नक्षत्र पर समाप्त होता है — इसलिए यहाँ बीस किलोमीटर के भीतर दोनों प्रणालियाँ रोज़ चलती हैं। आज अमांत परंपरा इस मास को भाद्रपद कहती है और पूर्णिमांत परंपरा आश्विन — तिथि दोनों में एक ही है।
यह पृष्ठ क्या नहीं बता सकता
यह पंचांग है, जन्मपत्री नहीं। यहाँ की तिथि, नक्षत्र, योग, करण और काल सबके लिए एक जैसे हैं — इनमें आपकी जन्मकुंडली, चंद्र राशि, चल रही महादशा या किसी मुहूर्त पर उदित होने वाला लग्न शामिल नहीं है। कई व्रतों का अपना नियम है: जन्माष्टमी मध्यरात्रि से तय होती है, दीपावली प्रदोष से, और कुछ एकादशी व्रत पारण-काल से — ऐसे दिनों में मंदिर की घोषणा इस पृष्ठ से एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। संदेह हो तो अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से मिलान करें।
गणना कैसे की गई
सूर्योदय और सूर्यास्त NOAA सौर-स्थिति मॉडल से तिरुपति के वास्तविक निर्देशांक (13.6288°N, 79.4192°E) के लिए निकाले गए हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण लाहिड़ी सायन-निरयन अंतर (अयनांश) पर आधारित निरयन गणना से, उसी स्थानीय सूर्योदय पर पढ़े गए हैं, और उनके समाप्ति-समय द्विभाजन विधि से लगभग एक मिनट की परिशुद्धता तक खोजे गए हैं। कोई मान किसी छपे हुए पंचांग से नक़ल नहीं किया गया।