नई दिल्ली का आज का पंचांग शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 · श्रावण कृष्ण द्वितीया
नई दिल्ली में आज सूर्योदय 05:42 IST पर है — नई दिल्ली से ठीक उसी समय, क्योंकि यह नगर 77.21°पू पर है जबकि घड़ी 82.5°पू के लिए तय है। नीचे दिया हर मान इसी स्थानीय सूर्योदय पर पढ़ा गया है, जो परंपरागत आधार है।
आज का पंचांग
तिथि क्रम
| दिन | तिथि | समाप्ति |
|---|---|---|
| कल (बीता) · गुरु 30 जुलाई | कृष्ण प्रतिपदा | 21:15 |
| आज · शुक्र 31 जुलाई | कृष्ण द्वितीया | 22:20 |
| कल (आने वाला) · शनि 1 अगस्त | कृष्ण तृतीया | 23:00 |
आज का विशेष
दिल्ली में कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ के लिए यमुना के घाट भर जाते हैं — संध्या अर्घ्य सूर्यास्त पर और उषा अर्घ्य अगले सूर्योदय पर दिया जाता है, इसलिए इस पृष्ठ पर दिया गया सूर्योदय-सूर्यास्त ही व्यावहारिक समय है। आश्विन के शुक्ल पक्ष में रामलीला विजयादशमी तक चलती है।
नई दिल्ली में आज श्रावण कृष्ण द्वितीया है, जो 22:20 तक रहेगी। कुछ भी नया आरंभ करने के लिए राहु काल 10:46–12:28 से बचें; दिन की सबसे स्वच्छ खिड़की अभिजित मुहूर्त 12:01–12:55 है।
नई दिल्ली — आगामी सात दिन
| दिनांक | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र 31 जुलाई | कृष्ण द्वितीया | धनिष्ठा | 10:46–12:28 |
| शनि 1 अगस्त | कृष्ण तृतीया | शतभिषा | 09:05–10:46 |
| रवि 2 अगस्त | कृष्ण चतुर्थी | पूर्वा भाद्रपद | 17:31–19:12 |
| सोम 3 अगस्त | कृष्ण पंचमी | उत्तरा भाद्रपद | 07:25–09:06 |
| मंगल 4 अगस्त | कृष्ण षष्ठी | रेवती | 15:49–17:30 |
| बुध 5 अगस्त | कृष्ण सप्तमी | अश्विनी | 12:27–14:08 |
| गुरु 6 अगस्त | कृष्ण अष्टमी | भरणी | 14:08–15:48 |
नई दिल्ली का मासिक कैलेंडर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नई दिल्ली में आज सूर्योदय कब है, और वह दिल्ली से अलग क्यों है?
नई दिल्ली में आज सूर्योदय 05:42 IST और सूर्यास्त 19:13 IST पर है — नई दिल्ली की तुलना में ठीक उसी समय। कारण देशांतर है: पूरा भारत एक ही घड़ी (82.5°पू) पर चलता है, जबकि नई दिल्ली 77.21°पू पर स्थित है, और हर डिग्री लगभग चार मिनट का अंतर लाती है। इस पृष्ठ की तिथि, नक्षत्र, राहु काल और चौघड़िया — सब इसी स्थानीय सूर्योदय से गिने गए हैं, किसी दिल्ली-आधारित पंचांग से नहीं।
यह पृष्ठ नई दिल्ली के लिए कौन-सी मास-परंपरा मानता है, और क्या इससे तिथि बदलती है?
यह पृष्ठ दिल्ली के लिए चांद्र मास को पूर्णिमांत परंपरा से नाम देता है — मास पूर्णिमा पर बदलता है, इसलिए पूर्णिमा के बाद का पखवाड़ा अगले मास का नाम ले लेता है। उत्तर भारत के लगभग हर छपे पंचांग की यही परंपरा है, और चूँकि अधिकांश पंचांग दिल्ली के देशांतर के लिए ही छपते हैं, यहाँ का मास-नाम आपकी पोथी से मिलेगा। पुणे या बेंगलुरु का अमांत पंचांग उसी कृष्ण-पक्ष की रात को दूसरा नाम देगा, पर तिथि पर मिनट-दर-मिनट सहमत रहेगा। आज अमांत परंपरा इस मास को आषाढ़ कहती है और पूर्णिमांत परंपरा श्रावण — तिथि दोनों में एक ही है।
यह पृष्ठ क्या नहीं बता सकता
यह पंचांग है, जन्मपत्री नहीं। यहाँ की तिथि, नक्षत्र, योग, करण और काल सबके लिए एक जैसे हैं — इनमें आपकी जन्मकुंडली, चंद्र राशि, चल रही महादशा या किसी मुहूर्त पर उदित होने वाला लग्न शामिल नहीं है। कई व्रतों का अपना नियम है: जन्माष्टमी मध्यरात्रि से तय होती है, दीपावली प्रदोष से, और कुछ एकादशी व्रत पारण-काल से — ऐसे दिनों में मंदिर की घोषणा इस पृष्ठ से एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। संदेह हो तो अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से मिलान करें।
गणना कैसे की गई
सूर्योदय और सूर्यास्त NOAA सौर-स्थिति मॉडल से नई दिल्ली के वास्तविक निर्देशांक (28.6139°N, 77.2090°E) के लिए निकाले गए हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण लाहिड़ी सायन-निरयन अंतर (अयनांश) पर आधारित निरयन गणना से, उसी स्थानीय सूर्योदय पर पढ़े गए हैं, और उनके समाप्ति-समय द्विभाजन विधि से लगभग एक मिनट की परिशुद्धता तक खोजे गए हैं। कोई मान किसी छपे हुए पंचांग से नक़ल नहीं किया गया।