वाराणसी का आज का पंचांग सोमवार, 28 सितंबर 2026 · आश्विन कृष्ण द्वितीया
वाराणसी में आज सूर्योदय 05:49 IST पर है — नई दिल्ली से 24 मिनट पहले, क्योंकि यह नगर 82.97°पू पर है जबकि घड़ी 82.5°पू के लिए तय है। नीचे दिया हर मान इसी स्थानीय सूर्योदय पर पढ़ा गया है, जो परंपरागत आधार है।
आज का पंचांग
तिथि क्रम
| दिन | तिथि | समाप्ति |
|---|---|---|
| कल (बीता) · रवि 27 सितंबर | कृष्ण प्रतिपदा | 21:03 |
| आज · सोम 28 सितंबर | कृष्ण द्वितीया | 19:20 |
| कल (आने वाला) · मंगल 29 सितंबर | कृष्ण तृतीया | 17:19 |
आज का विशेष
कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली घाटों को भर देती है — दीप सूर्यास्त के बाद सीढ़ियों पर उतरते हैं और पूर्णिमा तिथि तब तक चल रही होती है। श्रावण में काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक की कतार रविवार की रात से लगती है, और दर्शन सूर्योदय से बहुत पहले ब्रह्म मुहूर्त में खुलता है।
वाराणसी में आज आश्विन कृष्ण द्वितीया है, जो 19:20 तक रहेगी। कुछ भी नया आरंभ करने के लिए राहु काल 07:19–08:49 से बचें; दिन की सबसे स्वच्छ खिड़की अभिजित मुहूर्त 11:25–12:13 है।
वाराणसी — आगामी सात दिन
| दिनांक | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम 28 सितंबर | कृष्ण द्वितीया | रेवती | 07:19–08:49 |
| मंगल 29 सितंबर | कृष्ण तृतीया | अश्विनी | 14:48–16:18 |
| बुध 30 सितंबर | कृष्ण चतुर्थी | भरणी | 11:48–13:18 |
| गुरु 1 अक्टूबर | कृष्ण पंचमी | कृत्तिका | 13:17–14:47 |
| शुक्र 2 अक्टूबर | कृष्ण षष्ठी | मृगशिरा | 10:18–11:48 |
| शनि 3 अक्टूबर | कृष्ण सप्तमी | आर्द्रा | 08:49–10:18 |
| रवि 4 अक्टूबर | कृष्ण अष्टमी | पुनर्वसु | 16:13–17:42 |
वाराणसी का मासिक कैलेंडर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाराणसी में आज सूर्योदय कब है, और वह दिल्ली से अलग क्यों है?
वाराणसी में आज सूर्योदय 05:49 IST और सूर्यास्त 17:49 IST पर है — नई दिल्ली की तुलना में 24 मिनट पहले। कारण देशांतर है: पूरा भारत एक ही घड़ी (82.5°पू) पर चलता है, जबकि वाराणसी 82.97°पू पर स्थित है, और हर डिग्री लगभग चार मिनट का अंतर लाती है। इस पृष्ठ की तिथि, नक्षत्र, राहु काल और चौघड़िया — सब इसी स्थानीय सूर्योदय से गिने गए हैं, किसी दिल्ली-आधारित पंचांग से नहीं।
यह पृष्ठ वाराणसी के लिए कौन-सी मास-परंपरा मानता है, और क्या इससे तिथि बदलती है?
काशी उसी पूर्णिमांत गणना का स्रोत है जो यह पृष्ठ उसके लिए मानता है, और यहाँ से छपने वाले काशी पंचांग ने पीढ़ियों तक उत्तर भारत का मानक तय किया है। एक स्थानीय बारीक़ी जानने योग्य है: वाराणसी कुछ पर्व-समय ज़िला-केंद्र के बजाय घाटों के सूर्योदय से रखता है, जो एक-दो मिनट का अंतर है — उतना ही जितना यह पृष्ठ दिल्ली के पंचांग से रखता है। आज अमांत परंपरा इस मास को भाद्रपद कहती है और पूर्णिमांत परंपरा आश्विन — तिथि दोनों में एक ही है।
यह पृष्ठ क्या नहीं बता सकता
यह पंचांग है, जन्मपत्री नहीं। यहाँ की तिथि, नक्षत्र, योग, करण और काल सबके लिए एक जैसे हैं — इनमें आपकी जन्मकुंडली, चंद्र राशि, चल रही महादशा या किसी मुहूर्त पर उदित होने वाला लग्न शामिल नहीं है। कई व्रतों का अपना नियम है: जन्माष्टमी मध्यरात्रि से तय होती है, दीपावली प्रदोष से, और कुछ एकादशी व्रत पारण-काल से — ऐसे दिनों में मंदिर की घोषणा इस पृष्ठ से एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। संदेह हो तो अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से मिलान करें।
गणना कैसे की गई
सूर्योदय और सूर्यास्त NOAA सौर-स्थिति मॉडल से वाराणसी के वास्तविक निर्देशांक (25.3176°N, 82.9739°E) के लिए निकाले गए हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण लाहिड़ी सायन-निरयन अंतर (अयनांश) पर आधारित निरयन गणना से, उसी स्थानीय सूर्योदय पर पढ़े गए हैं, और उनके समाप्ति-समय द्विभाजन विधि से लगभग एक मिनट की परिशुद्धता तक खोजे गए हैं। कोई मान किसी छपे हुए पंचांग से नक़ल नहीं किया गया।