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भोपाल का आज का पंचांग शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 · श्रावण कृष्ण द्वितीया

भोपाल में आज सूर्योदय 05:50 IST पर है — नई दिल्ली से 8 मिनट बाद, क्योंकि यह नगर 77.41°पू पर है जबकि घड़ी 82.5°पू के लिए तय है। नीचे दिया हर मान इसी स्थानीय सूर्योदय पर पढ़ा गया है, जो परंपरागत आधार है।

आज का पंचांग

तिथि
द्वितीया
तक 22:20
नक्षत्र
धनिष्ठा
तक 19:14
योग
सौभाग्य
तक 23:41
करण
तैतिल
तक 09:51
सूर्योदय
05:50
IST · भोपाल
सूर्यास्त
19:03
IST · भोपाल
राहु काल 10:4812:27 यमगंड 15:4517:24 गुलिक काल 07:2909:09 अभिजित मुहूर्त 12:0012:53

तिथि क्रम

दिनतिथिसमाप्ति
कल (बीता) · गुरु 30 जुलाईकृष्ण प्रतिपदा21:16
आज · शुक्र 31 जुलाईकृष्ण द्वितीया22:20
कल (आने वाला) · शनि 1 अगस्तकृष्ण तृतीया23:00

आज का विशेष

शहर से आधे घंटे पर स्थित भोजपुर का अधूरा शिवलिंग उसी चतुर्दशी को सबसे बड़ा मेला खींचता है, और वहाँ की कतार निशीथ काल से तय होती है, दिन के समय से नहीं। कार्तिक पूर्णिमा पर बड़े तालाब के घाटों पर दीपदान सूर्यास्त के बाद किया जाता है।

भोपाल में आज श्रावण कृष्ण द्वितीया है, जो 22:20 तक रहेगी। कुछ भी नया आरंभ करने के लिए राहु काल 10:4812:27 से बचें; दिन की सबसे स्वच्छ खिड़की अभिजित मुहूर्त 12:0012:53 है।

भोपाल — आगामी सात दिन

दिनांकतिथिनक्षत्रराहु काल
शुक्र 31 जुलाईकृष्ण द्वितीयाधनिष्ठा10:4812:27
शनि 1 अगस्तकृष्ण तृतीयाशतभिषा09:0910:48
रवि 2 अगस्तकृष्ण चतुर्थीपूर्वा भाद्रपद17:2319:02
सोम 3 अगस्तकृष्ण पंचमीउत्तरा भाद्रपद07:3009:09
मंगल 4 अगस्तकृष्ण षष्ठीरेवती15:4417:22
बुध 5 अगस्तकृष्ण सप्तमीअश्विनी12:2614:05
गुरु 6 अगस्तकृष्ण अष्टमीभरणी14:0515:43

भोपाल का मासिक कैलेंडर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोपाल में आज सूर्योदय कब है, और वह दिल्ली से अलग क्यों है?

भोपाल में आज सूर्योदय 05:50 IST और सूर्यास्त 19:03 IST पर है — नई दिल्ली की तुलना में 8 मिनट बाद। कारण देशांतर है: पूरा भारत एक ही घड़ी (82.5°पू) पर चलता है, जबकि भोपाल 77.41°पू पर स्थित है, और हर डिग्री लगभग चार मिनट का अंतर लाती है। इस पृष्ठ की तिथि, नक्षत्र, राहु काल और चौघड़िया — सब इसी स्थानीय सूर्योदय से गिने गए हैं, किसी दिल्ली-आधारित पंचांग से नहीं।

यह पृष्ठ भोपाल के लिए कौन-सी मास-परंपरा मानता है, और क्या इससे तिथि बदलती है?

भोपाल मध्य प्रदेश की सामान्य पूर्णिमांत परंपरा रखता है, इसलिए महाशिवरात्रि यहाँ के पंचांग में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पड़ती है जबकि नासिक या बेंगलुरु का पंचांग उसी रात को माघ के अंतर्गत रखता है। तिथि और उसका अंत-समय — वही दो आँकड़े जो जलाभिषेक का समय तय करते हैं — दोनों पुस्तकों में एक ही हैं। आज अमांत परंपरा इस मास को आषाढ़ कहती है और पूर्णिमांत परंपरा श्रावण — तिथि दोनों में एक ही है।

यह पृष्ठ क्या नहीं बता सकता

यह पंचांग है, जन्मपत्री नहीं। यहाँ की तिथि, नक्षत्र, योग, करण और काल सबके लिए एक जैसे हैं — इनमें आपकी जन्मकुंडली, चंद्र राशि, चल रही महादशा या किसी मुहूर्त पर उदित होने वाला लग्न शामिल नहीं है। कई व्रतों का अपना नियम है: जन्माष्टमी मध्यरात्रि से तय होती है, दीपावली प्रदोष से, और कुछ एकादशी व्रत पारण-काल से — ऐसे दिनों में मंदिर की घोषणा इस पृष्ठ से एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। संदेह हो तो अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से मिलान करें।

गणना कैसे की गई

सूर्योदय और सूर्यास्त NOAA सौर-स्थिति मॉडल से भोपाल के वास्तविक निर्देशांक (23.2599°N, 77.4126°E) के लिए निकाले गए हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण लाहिड़ी सायन-निरयन अंतर (अयनांश) पर आधारित निरयन गणना से, उसी स्थानीय सूर्योदय पर पढ़े गए हैं, और उनके समाप्ति-समय द्विभाजन विधि से लगभग एक मिनट की परिशुद्धता तक खोजे गए हैं। कोई मान किसी छपे हुए पंचांग से नक़ल नहीं किया गया।

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